ज्ञानदत्त जी की पगली पोस्ट से पगलिया तक

उडन तश्तरी  .... मैने पाया है कि श्री ज्ञानदत्त पाण्डे जी की मानसिक हलचल  उनके लिए मानस में चाहे जो भी हलचल मचाती हो मगर उसका एक रुप दूसरे के मन में हलचल मचाने का हमेशा रहता ही है. कभी मुझे लगता है कि अगर वो ब्लॉग और रेल नौकरी की बजाय राजनीति में हाथ आजमाते तो आज... [पूरी पोस्ट]
writer Udan Tashtari

संवाद

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[31 Jan 2010 20:00 PM]

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