किसी से भी नही गिला.....

दिशाएं संभल कर जब भी चला सिवा ठोकर के मुझे क्या मिला ? लेकिन मुझे इस बात का किसी से भी नही गिला। क्योंकि मेरा संभलना, उन मेरे अपनों के लिए दुखदाई हो जाता है। जिन्हें मेरी लापरवाही से चलना बहुत भाता है। इसी लिए मेरा इस तरह चलना उन्हे रास्तों मे पत्थर रखने को... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

परमजीत बाली

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[31 Jan 2010 19:12 PM]

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