दिल
तू ही बता,ऐ दिल मेरे,मैंने तो हमेशा तेरा ही कहाँ माना हैं |मेरे इस दीवानेपन को क्या समझूँ ?लगता हैं मैंने इश्क को कहाँ जाना हैं??हजारों सपने बोये मैंने,पर शायद फूलों को तो,सिर्फ काँटों को साथ निभाना हैं|जहाँ गीतों की महफ़िल सजनी थी,वहां सिर्फ सन्नाटो का...
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आमिर खान "तन्मय"
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[31 Jan 2010 13:30 PM]



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