`मार्क्स - जीवन और विचार`
दिल्ली में किताबों का मेला शुरू हो गया है। इसके कोर्पोरेटीकरण के बाद इसमें बिना पैसे वाले किताब के आशिकों का घुस पाना मुश्किल हो गया है, फिर भी ये ६-७ दिन नशे में डूबे रहने जैसे ही होते हैं। मगर यहाँ दूर कोच्ची में सिर्फ उदास ही हुआ जा सकता है सोचकर कि...
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Ek ziddi dhun
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[31 Jan 2010 08:29 AM]



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