‘बीप-बीप’ के बीच इमोशनल अत्याचार !!
साल में ऐसे मौके कम ही होते हैं जब आपको टीवी देखने का अवसर कुछ ज्यादा ही प्राप्त होता है। अभी मेरा दौर ऐसा ही चल रहा है। कुछ-कुछ खाली भी हू या यूँ कहिए कुछ खाली महसूस करने के लिए टीवी देखने लगा हूँ। लंबे सफर की थकान तब थोड़ी-बहुत उतर ही जाती है जब आधी...
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जितेन्द़ भगत
ये दुनिया ऊटपटांगा
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[31 Jan 2010 07:00 AM]



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