अमां मुर्गों की लडाई देख रिया था, लो खां तुम भी देखो, वो मुटल्ले को देखो कैसे फडक रिया है ...

सफ़ेद घर          अबे पकड ना उसको, साला देखता नहीं क्या रकत आ रेला है। जा ले जा के मालिश कर। थोडा पानी जास्ती मार।            ये वह शब्द थे जो मैंने कुछ मुर्गे लडाने वालों के मुंह से सुने थे जो... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश पंचम

विविध

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[31 Jan 2010 06:25 AM]

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