बावरा मन
ये मन का उड़ता पंछीआकाश को पाना चाहता हैजिस राह की कोई मंजिल नहीउस राह को तकना चाहता हैप्रणय बंधन में बँधे मनों कोप्रेम का नव अर्थ देना चाहता हैनामुमकिन सी तमन्ना कोआइना बनाना चाहता हैप्रणय बंधन में जकड़ी बेडी कोप्रेम की हथकड़ी लगाना चाहता हैतुमसे ही हर...
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वन्दना
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[31 Jan 2010 05:00 AM]



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