कविता पर दो कवितायें
(1) कविता याद रखना कविता याद रखनाकि जिन पलों में मैंने तुम्हें रचा थामैं बांट सकता थाउनमें जो मेरे अपने थे ।कर सकता था दो बात अधिकमां से जो अक्सर सिरहाने मेंआकर बैठ जाती थी रात कोजब मैं लौटता था अपने घरचंद दिनों की छुट्टियों में ।बाबू जी से बात करते...
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अमरेन्द्र:
कविता
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[31 Jan 2010 01:16 AM]



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