तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये। हाल ऐ दिल!
यूँ सोचता हूँ के कभी मिलूँ,तुझसे अचानक कहीं,खौफ़ बस इतना है,के तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये।...
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nadeem
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[31 Jan 2010 01:54 AM]



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