एक नयी खेल नीति : अशोक सेक्सरिया
हमारे-जैसे गरीब देश में खेलों का स्वरूप यह होना चाहिए कि उनमें प्रतियोगिता का तत्त्व कम-से-कम रहें, संगीत और नृत्य के तत्त्व अधिक रहें , कम-से-कम उपकरण हों और ऐसी सहजता हो कि अधिकाधिक लोग खेलने की ओर प्रवृत्त हों । इस बारे में गंभीरता से सोचना आवश्यक है...
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अफ़लातून
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[31 Jan 2010 01:35 AM]



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