कविता का स्वंयवर!!

शिल्पकार के मुख से नव वधु सी लजाती सकुचाती आईवह कविताबिना टिप्पणीबैरंग लिफ़ाफ़े सीलौट आईवह कविताकुछ दिन बादकविता का स्वंयवररचा गयाकर माल लिएरावण को वर आईवह कविताक्योंकिभरी सभा मेरावण ने धनुषखंडित किया अप्रीतम कोवर आई वह कविताआपकाशिल्पकार... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

शिल्पकार

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[30 Jan 2010 20:54 PM]

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