एक अहसास का नाम है मां
भाई समीरलाल (उड़न तश्तरी)ने मां को याद किया तो प्रतिक्रिया स्वरूप मुझे मेरी वह " मां" शीर्षक रचना याद आ गयी ,जो वर्षों पहले मेरे संग्रह " चीखता है मन " में प्रकाशित हुई थी. भाई समीरलाल जी को समर्पित रचना पेश है: अपने आगोशोँ मे लेकर मीठी नीँद सुलाती...
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अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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[30 Jan 2010 15:48 PM]



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