गजल
जो बात लगी दिल में उसे याद दिलाया न करो बार बार वो वाकया यूं दुहराया न करो। तुम कह के चले जाते हो अपने रस्ते मैं सोचती ही रह जाऊं यूं परेशां किया न करो। अपने कीमती समय से चन्द लमहे निकालते हो तुम फ़िर सब्र से बैठो जरा यूं खड़े ही चले जाया न करो। हर आहट...
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JHAROKHA
कविता
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[30 Jan 2010 13:13 PM]



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