नैतिकता, आनंद, दोयम दर्ज़ा , इन शब्दों पर फ़्लैशबैक के साथ ,कुछ ट्रेलर
ये तो मैं बहुत पहले ही समझ चुका था कि हिंदी ब्लोग्गिंग मे भी अन्य सभी समाजों की तरह मुद्दों की कंगाली का दौर तो आता जाता ही रहता है और उसी का ये परिणाम होता है कि फ़िर मुख्य धारा के विषयों, और आलेखों के ऊपर अक्सर वो कहते हैं अलाने फ़लाने..........या फ़लाने...
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अजय कुमार झा
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[30 Jan 2010 11:40 AM]



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