नवसुर में कोयल गाता है

हिंदी का शृंगार ये हैं सबकी जानी-पहचानी कविता की चार पंक्तियाँ -काली-काली कू-कू करती, जो है डाली-डाली फिरती! ... ... ... ... ... ... ... ... जो पंचम सुर में है गाती, वह ही है कोयल कहलाती! और ये हैं चार पंक्तियाँ एक अनजानी कविता की - जब बसंत का मौसम आकर, इस धरती पर सज... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

विज्ञान

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[30 Jan 2010 09:29 AM]

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