ज्योतिष के व्यावसायिक स्वरूप पर आपत्ति क्यों ?
जय श्री राम ............ | आदरणीय मित्रो,आज हम आप के एक बार फिर रू-ब-रू हैं | बात तो एक बार फिर से दिल की ही है | हमारे एक शुभचिंतक दीपक सक्सेना ने एक बात रखी है | इन का कहना है-"आप भी तो पैसे ले कर अपनी विद्या का मिसयूज़ ही कर रहे हैं |" बात दिल को लग...
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Dr.KUMAR GANESHE 369
ज्योतिष
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[30 Jan 2010 08:50 AM]



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