दूजा ब्याह

रचना रवीन्द्र दूजा ब्याहशब्द का कलम से जब ब्याह हुआ था मैं साक्षी थी और समाज साथ खड़ा थाहुए सातों वचन थे पूरे और सेंधुर दान हुआ थाआँखों ही आँखों में प्यार का इज़हार किया था, कलम ने फिर शब्द के माथे पे प्यार किया था सुहाग रात को सुखद स्पर्श का अहसास भी दिया था,खुश हो गए... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित

कविता

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[30 Jan 2010 08:26 AM]

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