समय चाहे जो भी लिखे, हम तो तठस्थ ही रहेंगे
आजकल जो हिंदी ब्लौग का माहौल बना हुआ है उसमें मेरे हिसाब से यही बात सही बैठती है.. तठस्थ ही रहें और अपनी ढफली बजाते रहने में ही भलाई है.. दो लोगों की अगर आपस में ठनी हुई है तो उसमें अपनी टांग ना घुसाने में ही मुझे भलाई दिखती है..मैं यह सब बातें इसलिये...
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[30 Jan 2010 06:35 AM]



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