सब का सब सच्चे जैसा था
खुद ही दिल में आग लगाईखुद नैनों की नींद उड़ाईहम तो सबकुछ भूल गये थेआप उन्हीं ने बात बताईबदनाम हमें क्या करती दुनियाखुद कालिख ले माथे लगाईसब का सब सच्चे जैसा थाजो भी झूठा दिया दिखाईसब मेरी ही चुनी हुई थींपड़ी जो कड़ियॉं मेरी कलाईजमाने भर की जलन थी जो भी आन...
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Rajey Sha
गजलनुमा
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[30 Jan 2010 04:48 AM]



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