नही आज तो कल दिल का शीशा टूट जाना है जरूर

दर्पण के टुकड़े देखिये अब जिन्दगी रंग दिखलाती है क्यावक्त ने खोला है फिरसे हम पे दरवाजा नयादोस्त या दुश्मन कहूं इस वक्त को तू ही बतायूँ तो मिलाता है मगर मिलते ही करता है जुदाजगती है उम्मीद कुछ पाने कि जब भी जिन्दगी सेये वक्त लाकर आइना हमको देता है दिखाक्या मुकद्दर है... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
4
[30 Jan 2010 03:59 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix