इतनी असंवेदनशीलता

मास्टरनी-नामा कल बस से उतरते समय मैं अपने बाकी पैसे कंडक्टर से मांगने की जुर्रत कर बैठी, जिसकी एवज में वह मेरे साथ इतनी बदतमीजी से पेश आया , कि अपमानित महसूस करने के साथ - साथ मैं एकबारगी हैरत में पड़ गई, और सोच में डूब गई कि क्या मैं अपने ही राज्य की बस में बैठी हूँ,... [पूरी पोस्ट]
writer Shefali Pande
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[30 Jan 2010 03:22 AM]

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