शाम कि सैर...(हास्य-वयंग्य)
दो विद्वान पुरुष शाम की सैर पर निकल पड़े!विद्वान् इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वो दोनों कुछ देर बाद ही पूरी मानवजाति के समक्ष एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करने वाले थो जो आज कि मानव-मानसिकता पर एक-दम फिट बैठता है!संध्या समय,सूरज दिन-भर कि थकान...
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kunwarji's
(हास्य-वयंग्य)
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[30 Jan 2010 03:27 AM]



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