विरोध ही बदलाव का मूल है...

दिल-ए-नादाँ अजीत कुमारव्यावसायिक सिनेमा और मीडिया, पापुलर कल्चर की वह सबसे पापुलर विधा है जिससे आप विचार या विरोध् के बुनाव या विस्तार की उम्मीद नहीं कर सकते। उल्टे खंडित सच के नाम पर यह विरोध्, संगठन, जनपक्षधरता और आंदोलन का लगातार माखौल उडाने में लगा है। आज की... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप पाण्डेय

अजीत की कलम

views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[30 Jan 2010 03:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix