देश को भी मुसर्रतों की जरूरत
अभी टेक्सास से मुसर्रत भाई का जवाबी ईमेल आया। आप नहीं जानते मुसर्रत भाई को... मैं भी नहीं जानता था। लेकिन पिछले दिनों जान गया कि जिन अंधेरी गलियों से सूरज भी कुछ परहेज के साथ कन्नी काट लेता है, वहां भी कई बार मेधा की रौशनी जरूर निकलकर आती है। मुसर्रत अली...
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संजीव
कभी कभार
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[30 Jan 2010 02:22 AM]



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