छोट बड़ो सब सम बसैं, हो रैदास प्रसन्न

Ek ziddi dhun जात पात के फेर में, उरझत हैं सब लोग!मानवता को खात है, रैदास जात का रोग!! ..... जात पात में जात है, ज्यों केलन में पातरैदास न माणुस जुड़ सके, जब तक जात न जात!! ..... ऐसा चाहौं राज मैं, जहां मिलै सबै को अन्न!छोट बड़ो सब सम बसैं, हो रैदास... [पूरी पोस्ट]
writer Ek ziddi dhun

रैदास

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[30 Jan 2010 01:47 AM]

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