कहने को हम हैं अपनी मर्ज़ी के मालिक
अपनी दुनिया भी कहाँ अपनी हैकहने को हम हैं अपनी मर्ज़ी के मालिकचप्पे चप्पे पे राज़ किसका हैअपनी धड़कन भी कहाँ अपनी हैअपनी चाबी तो खुद हमनेअपनी दुनिया के हाथों में थमाई हैकब ज़माने के हिलाये से हिले हमदिल के साज़ पे सुर-तालअपनी दुनिया की ही तो कारस्तानी...
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शारदा अरोरा
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[30 Jan 2010 01:31 AM]



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