अग्नि समर्पण
बड़े दिनों के बाद सूरज इतना तेज़ चमका था। सब कुछ ठीक-ठाक था। सही मुहूर्त में बिस्मिल्लाह किया था। और गाडी वास्तुशास्त्र के हिसाब से एकदम सही दिशा में दौड़ने लगी थी। शुरूआत में यह कब सोचा था कि चार कदम चलकर गाडी पटरी से उतर जायेगी। माना कि ज़मीन थोड़ी...
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Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
व्यंग्य
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[30 Jan 2010 01:27 AM]



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