सुबह की कटारी से रात काटी है
स्याह रात तेरी याद में काटी है.सुबह की कटारी से रात काटी है.मुस्कुराता हूँ देख के तुझे यूँ,जैसे छत्ते से मैंने शहेद चाटी है.खोई हो सिलवटों में ज़िन्दगी की,मैंने उम्र एक गिरह में काटी है.लिख-लिख के थक गया हूँ तुझे,कागज़ की सिल पे याद बाटी है.फिसल गए हैं...
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●๋• नीर ஐ
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[30 Jan 2010 00:04 AM]



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