रायपुर ब्लॉगर मीट कुछ :रोचक अनुभव -२
"जैसे अंग्रेजो ने पहले चाय का चस्का लगाया था मुफ्त में इसे पिलाकर वैसे ही अभी ब्लागिंग का चस्का लगाया जा रहा है| हो सकता है कि बाद में जब हमें इसकी आदत पड़ जाए तो फिर इसके लिए शुल्क लगने लगे| अभी नहीं पर कौन जाने दस-बीस वर्षो में ऐसा होने लगे|" ब्लॉगर...
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पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
chhattisgarh blogger meet
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[30 Jan 2010 00:30 AM]



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