बहुत हो चुका अब न झांसे में आना 'न जाने नया साल क्या गुल खिलाए' समापन के एक पायदान पहले सुनिये श्रद्धेय दादा भाई महावीर शर्मा जी और देवी नागरानी जी को

सुबीर संवाद सेवा म प्र तरही का समापन आ ही चुका है । आज की पोस्‍ट के बाद अब केवल एक और पोस्‍ट शायद लगे । क्‍योंकि मैं चाह रहा था कि समापन एक शायर और एक शायरा से हो । वैसे तो आज भी यही काम्बिनेशन है लेकिन अंतिम प्रस्‍तुति में भी यही होगा । ये चारों नाम मैंने आखिरी दो पोस्‍टों के... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
views
26
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
19
[29 Jan 2010 21:43 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix