बहुत हो चुका अब न झांसे में आना 'न जाने नया साल क्या गुल खिलाए' समापन के एक पायदान पहले सुनिये श्रद्धेय दादा भाई महावीर शर्मा जी और देवी नागरानी जी को
तरही का समापन आ ही चुका है । आज की पोस्ट के बाद अब केवल एक और पोस्ट शायद लगे । क्योंकि मैं चाह रहा था कि समापन एक शायर और एक शायरा से हो । वैसे तो आज भी यही काम्बिनेशन है लेकिन अंतिम प्रस्तुति में भी यही होगा । ये चारों नाम मैंने आखिरी दो पोस्टों के...
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पंकज सुबीर
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[29 Jan 2010 21:43 PM]



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