अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

पान की दुकान वृक्ष हों भले खड़े, हों घने,हों बड़े, एक पत्र-छाँह भी माँग मत,माँग मत, माँग मत!अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! तू न थकेगा कभी!तू न थमेगा कभी!तू न मुड़ेगा कभी!कर शपथ! कर शपथ! कर शपथ!अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!यह महान दृश्‍य हैचल रहा मनुष्‍य... [पूरी पोस्ट]
writer विनीत खरे

विनीत खरे

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[29 Jan 2010 14:17 PM]

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