तुम्हारे बिना!

dr ashok priyaranjan -डॉ. अशोक प्रियरंजनजिंदगी में कई बार चारों तरफबिखरती हैं खुशियां ही खुशियांमहकने लगते हैं फूलफैलने लगती है उनकी खुशबूआंखें देखती हैंहजारों हजार सपनेउम्मीदों की किरणेंफैलती हैं चेहरों परकह जाती हैं, बहुत कुछ बिना कहेपर मैं उन्हें महसूस नहीं कर... [पूरी पोस्ट]
writer dr. ashok priyaranjan

कविता

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[29 Jan 2010 14:39 PM]

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