बस य़ूँ ही ...
लो अब महंगी ज़िन्दगी और मौत सस्ती हो चली ।शहर को रवाना हुए लोग, कि खाली बस्ती हो चली ॥मुफ़लिसी ने इन होठों की मुस्कुराहट छीन ली , लेकिन, मेरे अश्को का कोई दावेदार नहीं, दिल को ये तसल्ली हो चली ॥यारो ने यारी निभाई कुछ इस तरह , ऐ मेरे रकीब , कि इस ज़हां मे,...
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dipayan
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[29 Jan 2010 14:09 PM]



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