हंसी
खुरदुरे चेहरे के रास्तों पे किलोमीटर तक चलती हंसीकिसी मोड दिल रह गयाकिसी गली जान फंसीहोठ से निकलते हुएनाक से गुजरते हुएआंखों की दूकान पेकानों की सुरंगों मेंसर पे पसर गयाबालों की झाडियों मेंलिपटी, फंसी, रची-बसीकिलोमीटर तक चलती हंसी....
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ritu raj
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[29 Jan 2010 14:07 PM]



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