हंसी

सलाम करता चलूं खुरदुरे चेहरे के रास्तों पे किलोमीटर तक चलती हंसीकिसी मोड दिल रह गयाकिसी गली जान फंसीहोठ से निकलते हुएनाक से गुजरते हुएआंखों की दूकान पेकानों की सुरंगों मेंसर पे पसर गयाबालों की झाडियों मेंलिपटी, फंसी, रची-बसीकिलोमीटर तक चलती हंसी.... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[29 Jan 2010 14:07 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix