प्रेमेन्द्र सिंह गौड़ ने अपने चित्रों में वस्तुओं को अपने अंतर्मन की किन्हीं सजीव भाव-सत्ताओं की छायाओं की तरह पकड़ा है

MUKESH MISHRA इंदौर के प्रेमेन्द्र सिंह गौड़ के अभी हाल में नई दिल्ली की त्रिवेणी कला दीर्घा में प्रदर्शित चित्रों को देखकर जो पहला अनुभव होता है वह यह कि आकृतिमूलक चित्रकार न होते हुए भी प्रेमेन्द्र अमूर्तन के चित्रकार नहीं हैं | यह अनुभव प्रेमेन्द्र की चित्र-रचना की... [पूरी पोस्ट]
writer MUKESH MISHRA
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[19 Oct 2009 11:46 AM]

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