जमाखोर की बात
अहसासों की जमाखोरी की ऐसे लत सी पड़ गई है.....................................भंवरे की धुन पर इठलाने की जैसे आदत सी पड़ गई है.पगडंडियों की भूलभुलैया से गुजर जाने हिम्मत सी बंध गई है.रिश्तों को निभाने की जैसे रवायत सी बन गई है. लम्हों को बीत जाने देने की...
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आओ बात करें .......!
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[29 Jan 2010 11:36 AM]



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