मेरा गिरना तेरा उठाना
तुम्हारे उठने औरमेरे गिरने के बीचबहुत कम फासला था.बहुत छोटी सी थी ये जमींया तो तुम उठ सकते थेया मै ही,मैंने उठने दिया दिया था तुम्हेअपने कंधो का सहारा देकरउसमे झुक गए मेरे कंधेआहत हुआ अंतर्मनपर ह्रदय प्रफुल्लित थाआत्मा की आवाज़ सुनकर.पर आज सबकुछ नागवार...
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shikha varshney
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[29 Jan 2010 11:17 AM]



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