शरीर दिखाने वाले कपडे पहनने को आजादी कतई नहीं माना जा सकता----(मिथिलेश दुबे)

Dubey आजादी को परिभाषित करना बहुत मुश्किल है। हर इंसान अपनी बुद्धि का सही उपयोग करते हुए आजादी की सीमा तय करता है। हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है, परंतु इसकी अधिकता कभी-कभी नुकसानदेह साबित होती है। आज बेटी-बेटे को समानता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन समाज का... [पूरी पोस्ट]
writer Mithilesh dubey

दुबे लेख आजादी

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[29 Jan 2010 09:33 AM]

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