जिंदगी से अब मिले
बनते रहे हमदर्द और मनमीत हो गए दूर तुम इतने हुए की , नजदीक हो गए ना वजूद कुछ मेरा बचा , ना हस्ती रही तेरी कुछ इस तरह से प्यार की, बस्ती में खो गएगुलाबों सी नर्मिया, महसूस होती है कदमो तलेकि दो हाथ उठाते है, दुआ में मेरे लिए ख्वाइश है युही शामिल, रह जाए...
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RaniVishal
जिंदगी से अब मिले
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[26 Jan 2010 21:34 PM]



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