विकासशील पेट का कुम्भ
विकास के कई आयाम हैं। विकसित होना और अविकसित होना इसके दो ध्रुवान्त हैं तो अर्द्धविकसित होना मध्यबिन्दु है। अर्द्धविकसित होने में एक स्थिरता का भाव है पर इसके अलावा एक भाव है विकासशीलता का। विकासशीलता के इस भाव में गतिशीलता है। बड़ी संभावनाएं छिपी...
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डॉ. कमलकांत बुधकर
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[29 Jan 2010 08:00 AM]



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