एक ग़ज़ल
बूँद पानी की हूँ थोड़ी सी हवा है मुझ मेंउस बिज़ाआत पे भी क्या ज़रफ़ा इना है मुझ मेंये जो एक हश्र शबो रोज़ बपा है मुझ मेंहो न हो कुछ और भी ...
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A.U.SIDDIQUI
एक शायर
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[29 Jan 2010 07:23 AM]



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