क्षणिकाएं

zakhm तुम मानो या ना मानोमुझे पता हैप्यार करती हो मुझेतुम स्वीकारो या ना स्वीकारोमुझे पता हैतुम्हारा हूँ मैंअश्क भी आते नहीदर्द भी होता नहीतू पास होकर भीअब पास होता नहीइक आती सांस के साथतेरे आने की आस बँधीऔर जाती सांस के साथहर आस टूट गयीतेरी पुकार में ही दम ना... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[29 Jan 2010 06:38 AM]

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