हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम

अनूप सेठी 4 पहाड़ियां और झाड़ियां (कांगड़ा के मसरूर में प्रचीन शैल-खनित मंदिर का इलाका) हम ऐसी जगह पर उतर आए जहां चोटियों पर चढ़कर घाटियों में उतर कर जाना होता था बस्तियों में जहां सरकार को सड़क बनाना तो आसान था लोगों को पानी की सीर ढूंढना मुश्किल किसान बीज बोते... [पूरी पोस्ट]
writer anup

कविता

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[29 Jan 2010 05:43 AM]

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