मत बनाओ....गाँव को अपना निशान
रहने दोगज भर जमीनरहने दोमाटी के घेरेरहने दोखुले सपनेथोड़े तेरे-थोड़े मेरेमत बांधो-सौंधी महकमत बांधोपगडंडी के घेरेकहाँ मिलेगा-फिर खुला दालानअतृप्त नयनपायेंगे कहाँखुला आसमानमतवाली बारिशकिन प्रेमी युगलों काकरायेगी स्नानयौवन की धड़कनकहाँ दौड़...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[29 Jan 2010 05:07 AM]



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