A poetess blog

A poetess blog सूख गयी बारिश की बूंदे ...आँख मेरी क्यों अबतक नम है , हंसी मेरी ढकती है घूँघट ...जब चेहरा दिखलाता ग़म है .ऐसा नहीं मेरे है ज्यादा ...और बाकी सबके ग़म कम हैं ,हाँ हम हंसकर जी लेते हैं ...मान लिया हममे ये दम है .... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[29 Jan 2010 04:37 AM]

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