ग़ज़ल टहनियों पे नयी सोच खिल के

अंकित वैसे आज जिस ग़ज़ल से आप मुखातिब हो रहे हैं वो आपके लिए नयी नहीं है, गुरु जी के ब्लॉग पे चल रहे तरही मुशायेरे में आप इससे रूबरू भी हो चुके होंगे मगर इसमें एक नया शेर है जिससे इस पोस्ट को लगाने का छोटा सा कारन मिल गया. इस ग़ज़ल का आखिरी शेर नया है. जो लोरी... [पूरी पोस्ट]
writer अंकित "सफ़र"

ग़ज़ल

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[29 Jan 2010 04:15 AM]

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