मैं दर्द पिया करता हूँ [ग़ज़ल] - डॉ. अनिल चड्डा

साहित्य शिल्पी मैं दर्द पिया करता हूँ, मर-मर के जिया करता हूँ,फिर भी इस दुनिया को, लहू अपना दिया करता हूँ!सब संगी-साथी छूटे, अपने थे जो वो रूठे,मन में जो बातें आयें, मैं खुद से किया करता हूँ!कोई वक्त न ऐसा आये, तुझको न याद दिलाये,अब तो मैं खुदा के बदले, तेरा नाम लिया... [पूरी पोस्ट]
writer साहित्य-शिल्पी

ग़ज़ल

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[29 Jan 2010 02:30 AM]

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