तब मैं कहाँ था ?

स्वप्नलोक कभी-कभी कुछ ऐसी बातें हो जाती हैं जो तत्काल शायद तुच्छ लगें लेकिन उन्हें हम जीवन भर भुला नहीं पाते । यह बातें यदि गावं की हों तो कहना ही क्या ।  रह रहकर वे हमारे मस्तिष्क-पटल पर उभरती हैं और  यादों को ताजा कर जाती हैं । हमें गुदगुदाती रहती हैं... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[29 Jan 2010 01:57 AM]

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