Veer Bahuti
गज़ल इस गज़ल को भी आदरणीय प्राण भाई साहिब ने संवारा है।बेशक अभी गज़ल मे गज़ल जैसा निखार नहीं आया मगर सीखने की राह पर हूँ। आपसब के प्रोत्साहन से और भाई साहिब के आशीर्वाद से शायद कुछ कर पाऊँगी। तब तक पढते रहिये इन को । धन्यवाद्जो बनाये यूँ फसाने ये जवानी ठीक...
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निर्मला कपिला
ग़ज़ल
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[28 Jan 2010 21:51 PM]



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