स्वलक्षण-शील

सच्चा शरणम् ’महाजनो येन गतः..’ वाला मार्गभरी भीड़ वाला मार्ग हैनहीं रुचता मुझे, जानता हूँ यह रीति-लीक-पिटवईयों की निगाह में निषिद्ध है, अशुद्ध है ।चिन्ता क्या ! मेरी इस रुचि में (या अरुचि में)बाह्य और आभ्यन्तर,प्रेरणा और व्यापार की साधु-मैत्री है... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

कविता

views
24
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
20
[28 Jan 2010 21:50 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix